अपने आप को Overthinking से बचाने की कला | (How to Save Yourself From Overthinking)

नमस्कार मित्रों,

अपनी गर्दन चारों तरफ घुमा कर देखने पर आप पाएंगे कि आपके चारों तरफ अधिकतर लोग जाने या फिर अनजाने में अधिक सोचने की बीमारी का शिकार है जिसको Overthinking कहते हैं । आज की इस ब्लॉग में मैं इसी पर बात करने वाला हूं और कोशिश करूंगा यह बताने की क्या वास्तव में Overthinking सही है या फिर यह हमारे लिए नुकसानदायक है।

1. Is Overthinking OK-

दोस्तों जीवन में बहुत सारी ऐसी चीजें या फिर ऐसे सवाल होते हैं जिनका उत्तर हां या ना में नहीं होता है बल्कि उनके पीछे के कारण को समझना पड़ता है तब जाकर हम उस चीज के बारे में अच्छे से जान पाते हैं ।
उन्हीं सवालों में से यह सवाल भी है कि हमारा ज्यादा सोचना हमारे लिए अच्छा है या फिर बुरा है ? मैं आपसे अगर सीधा कहूं कि आपकी ज्यादा सोचने की आदत आपके लिए किसी भी प्रकार नुकसान देने वाली नहीं है बल्कि यह तो आपके जीवन को बेहतर बनाने का काम करती है तो शायद आप इस बात पर विश्वास नहीं करेंगे । चलो हम इस बात की गहराई में जाते हैं ।
सबसे पहले हम समझते हैं कि ओवरथिंकिंग होती क्या है? सामान्य शब्दों में कहा जाए तो कोई ऐसा विचार या ऐसा सवाल या फिर कोई ऐसी समस्या जिसके बारे में हमारा दिमा हर वक्त लगातार सोचता रहता है ।

2. Why Overthinking ?

अधिकतर लोग कहते हैं कि ओवरथिंकिंग हमारे लिए नुकसानदायक होती है परंतु आपको जानकर हैरानी होगी मैं इतने सारे ब्लॉग लिख चुका हूं इनके पीछे का कारण भी ओवरथिंकिंग ही है । अब यही ओवरथिंकिंग जिन लोगों को नुकसान पहुंचा रही थी वही मेरे लिए मेरे भविष्य का निर्माण करने में मेरी सहायता कर रही है ।
➽ दोस्तों मैंने यह नहीं रखता कि आप कितना ज्यादा सोचते हैं बल्कि यह मायने रखता है आप किस चीज के बारे में सोचते हैं ।
देखो हम इसको इस तरह से समझते हैं कि आप के पास कोई समस्या है जो कि वास्तविक दुनिया में अस्तित्व रखती है और आपको उसका समाधान खोजना है । तो जो लोग कहते हैं कि जरूरत से ज्यादा सोचना हमारी खुशी को खत्म कर देता है तो इस समस्या को हम बिना सोचे कैसे उसका हल निकाल सकते हैं । समस्या जितनी बड़ी होती है हमें उतना ही ज्यादा उसके बारे में सोचना पड़ता है अर्थात हमें उस पर तरह-तरह के विचारों की बौछार करनी होती है जिससे उसका कोई ना कोई समाधान निकल आता है ।
आपके लिए Overthinking अच्छी होगी या बुरी होगी इस बात का निर्णय हमारा वह सवाल या फिर टॉपिक करता है जो हमने thinking करने के लिए चुना है ।

➽ उदाहरण के तौर पर आप एक सुंदर बगीचे के बारे में सोच रहे हैं या फिर हम कह सकते हैं कि बहुत अधिक सोच रहे हैं तो उस वक्त आपको आपके अंदर कैसा महसूस होगा । मुझे लगता है कि स्वभाविक ही आपको बहुत अच्छा महसूस होगा परंतु वहीं आप किसी लास्ट के बारे में लगातार बहुत अधिक सोचते हैं तो आपके अंदर सोते ही दुख प्रकट होने लगता है और बुरे ख्याल आने लगते हैं । इस उदाहरण से आप को साफ हो गया होगा की समस्या सोचने में नहीं है बल्कि किस बारे में सोचा जा रहा है इसमें है ।

3. Overthinking Generates Solutions-

विज्ञान ‌ के क्षेत्र में सर आइंस्टीन को देखें तो उन्होंने जितने भी ब्रह्मांड के बारे में सिद्धांत दिए वह सभी दिमाग की Overthinking करने की वजह से ही निकले हैं । इन सिद्धांतों को देने से पहले आइंस्टीन किसी टॉपिक को निर्धारित कर दुकान पर चाय पीने के लिए नहीं बैठ जाते थे,बल्कि उनका दिमाग लगातार उस टॉपिक के बारे में नए नए विचारों पर काम करता रहता था अर्थात वह लगातार सोचते रहते थे ।
अब बात करते हैं उन लोगों के बारे में जो कहते हैं कि Overthinking से जीवन में नकारात्मक चीजें आती हैं । देखिए यहां पर दिक्कत Overthinking से नहीं है बल्कि आप Overthinking के दौरान सकारात्मक सोचते हैं या फिर क्या नकारात्मक सोचते हैं उस चीज से है । अगर आप किसी सकारात्मक चीज पर लगातार विचार किए जा रहे हैं तो आपके अंदर खुशी की अनुभूति होना लाजमी है,परंतु यदि आप किसी नकारात्मक चीज पर लगातार विचारों के प्रभाव में बहते जा रहे हैं तो आपके अंदर दुख का आविर्भाव हो सकता है ।

4. Selective Overthinking-

आपको इस चीज का अभ्यास करना चाहिए कि आप ज्यादा से ज्यादा Overthinking के लिए अपने दिमाग को सकारात्मक विचार प्रदान कर सकें। साधारण शब्दों में कहा जाए तो Overthinking के दौरान हम केवल बिना काम की फालतू चीजों के बारे में सोचते हैं । वहीं अगर किसी सही सवाल यह किसी सही समस्या पर Overthinking करें तो शायद उसका एक बेहद ही अच्छा हल निकल कर आ सकता है । इसके लिए हमें जागरूक होना होगा,अपने विचारों के प्रति कि जब आप किसी भी विषय पर सोचने की शुरुआत करते हैं तो आपको देखना चाहिए कि वह विषय आपके जीवन में सकारात्मक चीजें लेकर आएगा या फिर ऐसी चीजें जिनका आपके वास्तविक जीवन से कोई लेना देना नहीं है ।
➽ आप अपने दिमाग को कभी भी विचार करने से नहीं रोक सकते । अगर आपको कोई बोलता भी है कि आपको अपने विचारों पर नियंत्रण करना चाहे यह तो इससे बड़ी बेवकूफी कोई नहीं हो सकती । विचारों को आना दिमाग की सहज और स्वाभाविक प्रक्रिया है परंतु किस तरह के विचार आएंगे इस चीज को आप नियंत्रित कर सकते हैं । अगर आपके मन में या दिमाग में विचार नहीं आएंगे तो फिर आप वास्तविक जिंदगी में आने वाली समस्याओं का समाधान कैसे निकालेंगे ।
मान लीजिए आपको किसी विषय पर एक उपन्यास लिखना है अथवा कोई कहानी लिखनी है, तो आपको उसके लिए जरूरत से ज्यादा सोचना ही पड़ेगा, क्योंकि जिस तरह आप सामान्य जीवन में सोचते हैं उस तरह एक कहानी या किताब आप कभी लिख ही नहीं पाएंगे ।

➽ जब आपको पता होता है अर्थात आप जागरूक होते हैं कि आप क्या सोच रहे हैं तो उससे हमें किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती है बल्कि बहुत बार जब हमें पता ही नहीं होता कि किस तरह की चीजें हमारा दिमाग सोच रहा है तो हमें चिंता और तनाव जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है । अपनी इच्छा से अपने फायदे के लिए किसी भी विषय पर Overthinking करना कभी नुकसानदायक होता ही नहीं है , बल्कि इससे तो हमारे दिमाग की सकारात्मक सोचने की आदत बन जाती है ।

मैं आप सभी से यही निवेदन करना चाहूंगा कि आगे से आपको Overthinking की आदत को बुरी नजर यस नहीं देखना है बल्कि उसका इस्तेमाल सकारात्मक चीजों का हल ढूंढने में करना है ।

इस ब्लॉग को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद ।

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