काम में ज्यादा समय तक मन नही लगता (How to Make Consistency In Work)

नमस्कार दोस्तों,

How to Make Consistency In Work:- हमेशा की तरह आज भी आपका इस ब्लॉग में बेहद स्वागत है । आज का यह ब्लॉग वैसे तो सभी के लिए बहुत ज्यादा मूल्य रखने वाला है परंतु फिर भी मैं आपको बताना चाहूंगा, जिन लोगों को बार-बार अपने काम से बोरियत हो जाती है यानी काम करने की जो चाह‌ है, वह खत्म हो जाती है, उन लोगों के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण ब्लॉग है ‌। मैं ऐसे ही कुछ कारण आपको बताने वाला हूं,जिनकी वजह से हम किसी भी काम पर लगातार नहीं टिक पाते हैं और उस को बीच में ही छोड़ देते हैं ।

1. क्या हो अगर परिणाम आपकी अपेक्षा के अनुसार ना आये –

दोस्तों हम जीवन में जो भी काम करते हैं अक्सर उसका परिणाम हमारी उम्मीदों के अनुसार नहीं आता है और इसमें कोई शक भी नहीं है कि यह चीजें आपको स्वीकार करनी आनी चाहिए । अगर आप कुछ काम करते हैं और किसी कारण बस उसका परिणाम आपके पक्ष में नहीं आता है तो आपके मन में उस काम को छोड़ने के तरह तरह के विचार आते हैं और कई बार तो हम अपना काम ही बदल लेते हैं । दोस्तों अगर हम इस तरह चीजों से डर कर अपने काम को बदलते रहे तो शायद हम कभी भी अपनी जिंदगी में किसी एक काम पर नहीं टिक पाएंगे और ऐसे में हम पूरी जिंदगी बर्बाद कर लेंगे । हम किस तरह अपने किसी एक काम पर टिके और उसको किस तरीके से करें कि हमें उसके परिणाम सकारात्मक और नकारात्मक आने पर ज्यादा प्रभाव ना पड़े ?

2. काम नही तरीका बदलो –

दोस्तों यह एक साधारण सी बात है कि अगर हम किसी काम को लगातार किसी एक ही तरीके से करते रहते हैं तो चाहे आप अपने काम से कितना भी प्यार करते हो आप उससे ऊब जाते हैं । इसलिए मैं आपको यहां पर यही सलाह देना चाहूंगा कि आपका जो भी लक्ष्य है उसके लिए आप जो भी काम करते हैं उसको करने के तरीके हर रोज बदलते रहें अर्थात उन तरीकों को बेहतर बनाते रहे । किसी भी काम को करने की हमेशा बहुत सारे तरीके उपलब्ध रहते हैं और संभावनाएं कभी खत्म नहीं होती तो हमें प्रयास करना चाहिए हमारे काम में नए-नए तरीकों को आजमाने का और उसे और अधिक बेहतर बनाने का ।

3. काम में ऊर्जा की कमी –

दोस्तों मैं यहां पर आपसे एक बात पूछना चाहता हूं कि जिस दिन आपने अपने काम की शुरुआत की थी उस वक्त आपके अंदर जो जोश और जो जुनून था क्या अब भी आप अपना काम करते वक्त वही महसूस करते हैं ?‌
जहां तक इस बार में मेरा विचार है 95% लोगों का जवाब ना ही होगा ।
इसका एक मनोवैज्ञानिक कारण भी है क्योंकि जब हम एक समान पैटर्न लगातार अपने जीवन में रिपीट करते रहते हैं, तो उससे हमारा दिमाग अक्सर बोर हो जाता है । दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि जिस वक्त हम अपना लक्ष्य तय करते हैं कि हमें जीवन में क्या करना है तो उस वक्त हम हमारे सामने उस लक्ष्य के परिणाम को भी सोचते हैं जिससे हमारे मन में एक प्रकार की ऊर्जा का संचार होता है । जैसे जैसे हम उस काम को एक ही तरीके से करते रहते हैं तो धीरे-धीरे उस उर्जा में भी कमी आने लगती है ।
इसलिए मैंने आपको कहा था कि हमें हमेशा कोशिश करनी चाहिए कि हमारा जो काम करने का तरीका है वह समय के साथ बदलता रहे और उसे और बेहतर करते रहना चाहिए।

4. किये गये काम का हिसाब -किताब जरुरी –

चलो दोस्तों हम इसका एक और कारण समझते हैं,
उदाहरण के माध्यम से- माली जी आज आपने कोई काम करने का निर्णय लिया और उसको करना शुरू किया । इसके बाद उसी काम को आपने कल की या फिर परसों किया और लगभग 15 दिन तक आपने उस काम को किया । दोस्त यहां पर फिर से मैं आपको एक मनोवैज्ञानिक तथ्य बताना चाहूंगा कि हमारा दिमाग जल्दी-जल्दी Reward मिलने वाले कामों को प्राथमिकता पर रखता है तो 15 दिन तक काम करते हुए हमें किसी भी प्रकार का कोई Reward नहीं मिलता है | इसका भी एक कारण मैं आपको बता देता हूं ।
ज्यादातर लोग अपना काम करते वक्त उस काम को कैलकुलेट नहीं करते हैं अर्थात आप ने पिछले 15 दिनों में जितना काम किया उससे आपने अपने लक्ष्य तक कितनी दूरी तय की या फिर उसका कितना आउटपुट आया इसका हिसाब-किताब ही नहीं रखते हैं, जिससे हमारे दिमाग को लगने लगता है कि इस काम से कोई आउटपुट ही प्राप्त नहीं हो रहा है इसलिए दिमाग धीरे-धीरे उस काम को लेकर के सीरियस नहीं रहता है । किसी खास है कारण की वजह से कहा जाता है कि आपको अपने काम को समय-समय पर चेक करते रहना चाहिए कि आप जो भी कर रहे हैं उसका परिणाम क्या रहा है और परिणाम सही आ रहा है अथवा गलत आ रहा है। अगर परिणाम आपके पक्ष में नहीं है तो दिमाग कोशिश करता है कि परिणाम को सही करने के लिए फिर से एक नए रास्ते के द्वारा उस काम को किया जाए और उस पर और अधिक मेहनत की जाए वहीं अगर परिणाम सही आता है तो हमारे दिमाग को सकारात्मक संदेश मिलता है और मैं और लगन के साथ उस काम को करने का प्रयास करता है ।
इन सब चीजों को ध्यान में रखते हुए यह अति आवश्यक बन जाता है कि आप अपने काम को समय-समय पर Measure करते रहें।

5. अनुशाशन एक जरुरी पहलु –

जब हम अनुशासन की बात कर रहे हैं तो एक चीज का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी होता है,वह है अपने फोकस को Measure करना ।
जिस तरह मैंने यहां पर काम को Measure करना बताया हैउसी प्रकार आपको अपना फोकस भी Measure करना है,अर्थात अगर किसी काम को करते वक्त आप का आज जो ध्यान है वह कल उसी काम को करते वक्त बढ़ना चाहिए । जैसे मैं आज किसी ब्लॉग को लिख रहा हूं,तो इसमें मेरा कितना ध्यान है ,इसकी तुलना मुझे आने वाले कल में जब मैं ब्लॉग लिख रहा होऊंगा उस वक्त मेरा जो ध्यान होगा उससे करनी चाहिए । अगर मेरा ध्यान प्रतिदिन अपने काम में बढ़ता नहीं जा रहा है तो आप यह बात अपने दिमाग में बिठा लीजिए की आप अपने लक्ष्य तक कभी भी नहीं पहुंच पाएंगे बल्कि किसी एक ही पायदान पर अटक कर रह जाएंगे ।
आप मेरे पहले और अब के आर्टिकल्स को Compare करके देख सकते हैं कि पहले में मोटे तौर पर चीजों को लिखता था,परंतु अब मैं किसी एक ही टॉपिक की गहराई में बहुत अंदर तक सोच लेता हूं और लिख पाता हूं ।

➥जब शुरुवात की थी तो उस वक्त मुझे इन आर्टिकल्स को लिखने में इतना मजा नहीं आता था जितना मुझे अब आता है और मैं जब आर्टिकल लिखने बैठता हूं तो मेरा ध्यान लगातार बढ़ता रहता है और मैं उस मुद्दे की गहराई में और अधिक जाता रहता हूं । दोस्तों जीवन इसी तरह काम करता है| हमारा ध्यान जिस चीज पर जितना ज्यादा गहरा होता जाता है हमें उतना ही उस चीज में आनंद आता है और जितना हमें किसी चीज में आनंद आता है उतना ही हमारा ध्यान उस में बढ़ता जाता है ।

➥जब आपका ध्यान अपने काम में बढ़ता जाएगा तो आपको अपने काम से जुड़े हुए नए नए आइडिया जाने लगेंगे। आप सोचोगे कि यह आइडियाज मुझे आज से पहले तो आए ही नहीं। इन नए नए आइडिया से आपके दिमाग को अपने आप पर भरोसा होने लगेगा और वह और अधिक शिद्दत के साथ उसका में जुड़ जाएगा ।

➥इस ब्लॉग के अंत में मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि आप नित्य प्रति अपने आप को बेहतर बनाने की कोशिश करें, अपने ध्यान को इंप्रूव करने की कोशिश करें, काम से जुड़ी हुई नई नई चीजों को पढ़ने की कोशिश करें, अपने काम के तरीकों को बदलने की कोशिश करें । जब आप अपने काम में आपका ध्यान होगा और आपको आनंद आएगा तो आप कभी भी अपने काम से बोर नहीं होंगे ।

धन्यवाद !

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