बिल्कुल विपरीत परिस्थितियों में भी साहसपूर्वक आगे कैसे बढ़ें ? How To Face Most Worst Situations In Life

नमस्कार दोस्तों,How To Face Most Worst Situations In Life:- मुझे उम्मीद है आप सभी लोग स्वस्थ होंगे और दिन प्रतिदिन खुद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे होंगे। हमें कई बार ऐसा महसूस होता है कि हमें अब अपने आप पर भरोसा नहीं रहा । आपके अंदर कुछ भी करने का जज्ब , साहस और आत्मविश्वास खत्म सा होने लगता है। आज के इस Blog में हम इसी मुद्दे पर बात करने वाले हैं।

1. Judging Oneself After Little Failures –

मित्रों यह परिस्थिति तब उत्पन्न होती है जब हम अपने आप को Judge करने लगते हैं । किसी भौतिकवादी सफलता के ना मिलने पर आप ऐसी घटिया चीजें सोचने लगते हैं। जब आपका उद्देश्य जीवन में बहुत ही गवा दी सफलता प्राप्त करना हो जाता है तो फिर उसके ना मिलने पर आपको लगता है कि आपका जीवन बर्बाद हो गया। आपको लगता है कि आप के हक में परिणाम नहीं आ रहा तो आपकी मेहनत बेकार है, आपके किए गए प्रयास बेकार हैं, मेरी किस्मत बेकार है परंतु आपने एक बार भी यह नहीं सोचा कि सफलता केवल मेहनत या फिर केवल प्रयासों की बदौलत नहीं मिलती है । किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए और उसमे सफलता प्राप्त करने के लिए अन्य और भी बहुत सारे Factor मायने रखते हैं।

प्रिय साथियों हमेशा की तरह एक कहानी का इस्तेमाल करते हैं इससे चीज को समझने के लिए –

➥ Birth Of Situation –

एक बार एक मजदूर का बेटा बीमार पड़ जाता है और इसके इलाज के लिए एक बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता होती है । इस ऑपरेशन में इतने पैसों की आवश्यकता थी कि वह मजदूर अपने वर्तमान मजदूरी से उसका इलाज नहीं करवा पाता । उस मजदूर ने 9 घंटे की बजाय 15 से 16 घंटे काम करना शुरू कर दिया । उसके पास जितने भी Resources थे, उन सभी से जितना हो सका पैसा इकट्ठा किया ।‌ अपने घर के अंदर जितनी भी चीजें बेच सकता था उसने बेची और जरूरत का पैसा इकट्ठा करने की कोशिश की। काफी समय तक पैसे इकट्ठा करने के बावजूद भी इलाज के लिए पर्याप्त पैसा इकट्ठा नहीं हो पाया परंतु इतना पैसा हो गया था कि उसको अपने आप पर भरोसा होने लगा कि मैं कुछ दिन में ही अपने बेटे का ऑपरेशन करवा लूंगा । वह इंसान निरंतर मेहनत करता रहा और उसका शरीर भी आधा रह गया। उसके चेहरे पर समय से पहले ही बुढ़ापे की झलक देखने लगी।। इतना सब होने के बावजू उसके मन में एक बार भी ख्याल नहीं आया कि मुझे रुकना चाहिए, क्योंकि उसके दिल में एक ही फितूर सवार था और वह था अपने बच्चे की जिंदगी को बचाना ।‌ वह जब भी अपने बच्चे की मासूम आंखों में देखता तो उसको और अधिक मेहनत करने का साहस मिलता और सोचता कि नहीं मुझे अभी और लड़ना है।

➥ Face Of Untolerable Problem –

दोस्तों अभी मैं आपको जो बताने वाला हूं वह आपको हैरान कर देगा। एक बार वह रात भर मजदूरी करता रहा और जब घर आया तो उसके होश उड़ गए। उसको पता चला कि रात घर में चोर घुस गए थे और उन्होंने उसकी पत्नी को मार मार कर घायल कर दिया तथा घर में मौजूद सारा पैसा ले गए। उसने जैसे तैसे घर के बाहर रखे हुए पैसे से अपनी बीवी का इलाज करवाया और उसके पास सब कुछ भी नहीं बचा था। दोस्तों इस वक्त उसके बाद घर में कोई पैसा नहीं था साथ में उस पर बहुत सारे लोगों की उधारी के पैसे भी हो गए थे।
उसके अंदर जो बच्चे का ऑपरेशन कराने की उम्मीद थी वह भी पूरी तरह जा ही चुकी थी और उस बच्चे की मृत्यु निश्चित हो गई। ताबड़तोड़ मेहनत करने के बावजूद भी वक्त ने उसके सामने अपने ही बच्चे को दम तोड़ते हुए देखने की परिस्थिति उत्पन्न कर दी। ऐसी हालातों में उसने अपना काम करने का साहस पूरी तरह खो दिया और परिस्थितियां ऐसी आ गई कि उसकी बीवी को काम करना पड़ रहा था परंतु फिर भी घर ठीक से नहीं चल पा रहा था।
उसके मन में एक Guilt पैदा हो गया की मैं बचा सकता था फिर भी नहीं बचा पाया।

➥ Getting Right Advice –

इन सारी परिस्थितियों से जूझते हुए उसकी बीवी ने एक कदम उठाया और अपने पति को एक साधु के पास लेकर गई। उसने अपने साथ बीती हुई सारी बातें रोते हुए साधु को बताई। साधु ने उसके पति को कहा कि तुम्हारे साथ जैसे भी,जो भी हुआ अत्यधिक बुरा हुआ। ऐसी परिस्थिति में कोई भी इंसान टूट जाता है परंतु तुम तो पूरी तरह बिखर ही गए। जिस तरह से तुम टूट कर बिखरे हो उससे तुम में और एक किसी मरे हुए इंसान में ज्यादा फर्क नहीं है।
तुम्हारी सबसे बड़ी गलती यह है कि अपने आप को भगवान समझ लिया है। तुम अपने बच्चे की किस्मत के भगवान बनना चाहते थे और प्रत्येक चीज स्वयं करना चाहते थे। यही कारण है कि तुम पश्चाताप की आग में रोज रोज मर रहे हो। किसी इंसान के बिछड़ जाने का दुख अपने आप में बहुत भयंकर होता है और फिर साथ में अगर पश्चाताप भी हो तो इंसान बिखर ही जाता है।
साधु ने उन पति पत्नी से पूछा कि तुम्हारे पैसे चोरी ना होते और तुम अपने बच्चे का ऑपरेशन करवा लेते परंतु ऑपरेशन के दौरान या ऑपरेशन के बाद किसी कारण से वह बच्चा मृत्यु को प्राप्त हो जाता तो तुम किसको दोष देते?
अगर तुम्हारे पुत्र का इलाज कराने से पूर्व ही तुम किसी दुर्घटना में मृत्यु को प्राप्त हो जाते तब क्या करते? उस दिन रात्रि में आए हुए चोर अगर तुम्हारी पत्नी को जान से ही मार देते तब तुम क्या करते?
इस दुनिया के अंदर चाहे मैं हूं,तुम हो,तुम्हारी पत्नी हो या हर कोई भी इंसान अपनी परिस्थितियां स्वयं नहीं बना सकता बल्कि उसके पीछे अन्य बहुत सारे कारण होते हैं। जब अचानक कोई परिस्थिति इंसान के सामने आकर खड़ी हो जाती है तो उस वक्त इंसान के हाथ में सिर्फ उस परिस्थिति का सामना करना ही होता है। अपने पुत्र को संकट में देखकर तुमने जिन परिस्थितियों में कठोर मेहनत की है और प्रयास किए हैं उनको देखकर तुम्हें अपने आप पर गर्व होना चाहिए क्योंकि हजारों में से केवल एक इंसान ही ऐसा होता है जो इतना सब कर पाता है।

2. Be The Powerful Hero Of Your Story –

एक मनुष्य कभी भी अपनी कहानी की रचना स्वयं नहीं करता बल्कि वह अपने कर्मों की रचना करता है, जिससे उसकी कहानी बनती है। जो तुम्हारे पास आज नहीं रहा,उसको तुम अपनी भावनाओं में और दिल में समेट कर रखो और जो लोग तुम्हारे पास बचे हुए हैं उनका हर संभव तरीके से ख्याल रखने की कोशिश करो। एक सच्चे और अच्छे कर्मयोगी की यही पहचान होती है कि वह अपने भाग्य और किस्मत से लड़ता हुआ हमेशा आगे बढ़ता रहता है। तुमने अब तक जो किया उससे तुम गर्व करने के हकदार हो,परंतु अब इसके बाद जो भी तुम करोगे वह तुमको और अधिक गौरवान्वित महसूस करवाएगा।

3. Belive In Karma Always –

दोस्तों इस कहानी से हमें एक चीज साफ तौर पर नजर आती है कि हमें कभी भी उन चीजों के लिए अपने आप को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए जिन पर हमारा कोई वश नहीं होता है। प्रकृति और ईश्वर के द्वारा जनित परिस्थितियों से लड़ने के लिए केवल आपका कर्म ही एकमात्र हथियार होता है। पश्चाताप की आग में केवल उन लोगों को जलना चाहिए जो लोग जानबूझकर किसी बुरे वाकया को अंजाम देते हैं।

आपको जीवन में कभी भी उन लोगों को बड़ा नहीं समझना है जिनके पास पैसा है बल्कि जिन लोगों के पास कठोर मेहनत करने का जज्बा होता है, जो लोग अपने कर्मों में विश्वास करते हैं, बुरी से बुरी परिस्थितियों में भी लड़ना जानते हैं और कभी परिणाम को देखकर हताश नहीं होते वही लोग असल में बड़ा समझने लायक होते हैं। दोस्तों तुमको अपनी कहानी का रचयिता नहीं बनना है बल्कि उसका नायक बनना है जिसके कर्मों में कहानी का अंत बदलने की ताकत होती है।

Thank You!

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