जीवन में Aware होना कितना महत्वपूर्ण है ? (How to Be Aware Every time In Life)

How to Be Aware Every time In Life

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नमस्कार दोस्तों,

How to Be Aware Every time In Life:- आज के ब्लॉग की शुरुआत में एक उदाहरण से करना चाहूंगा,जिसको मैंने हाल ही में सुना है । यह उदाहरण हमें बताएगा कि जीवन में हमारा जागृत अवस्था में होना अर्थात Aware होना कितना ज्यादा महत्वपूर्ण है ।

How to Be Aware Every time In Life

1. हमेशा उम्मीद रखें –

दोस्तो आप तक नहीं देखा होगा कि जब किसी अंधेरे और सुनसान कमरे में कोई सोता हुआ छोटा सा बच्चा अचानक से जाग जाता है और उस परिस्थिति में उसके पास उसके माता-पिता में से कोई भी नहीं होता है तो वह जागते ही बहुत ज्यादा घबरा जाता है और जोर जोर से रोना शुरू कर देता है । मेरे पास मेरी मां भी नहीं है और ना ही मेरे पास पिता है । क्या यह अंधेरा हमेशा रहने वाला है या फिर यह दुनिया ऐसे ही खत्म हो जाएगी ? क्या मेरे पास मेरे माता-पिता आ पाएंगे ? शायद ऐसे ही विचार उस बच्चे के मन को डरा देते हैं । ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उस वक्त बच्चे के अंदर इतनी चेतना विकसित नहीं हो पाती है कि वह सोच सके इस कमरे के बाहर भी कोई दुनिया है, इस अंधेरे के अलावा भी बाहर दुनिया में प्रकाश है । कुछ समय बाद मेरे माता-पिता आएंगे और मुझे ले जाएंगे । यह सब सोचने की चेतना ना होने की वजह से वह बच्चा जोर-जोर से सीखना शुरू कर देता है । इसी को एक प्रकार की नाउम्मीदी ही कह सकते हैं क्योंकि उसके अंदर बिल्कुल उम्मीद ही नहीं होती है कि यह सारा कुछ अस्थाई है और कुछ समय बाद मेरे माता-पिता कर मुझे ले जाएंगे ।

2.  समस्याओ की दिवार से आगे झाँकने की कोशिश –

दोस्तों यह ना नाउम्मीदी बचपन तक ठीक है परंतु आज हम देख पा रहे हैं लोग अपने जीवन का आधा वक्त बिता देते हैं परंतु उनके साथ यह समस्या अभी भी बनी रहती है । इसका सबसे बड़ा कारण होता है इंसान में जीतना की कमी होना और ज्ञान का अभाव होना । इसलिए अक्सर ऐसे इंसान सोच लेते हैं कि हम जिस भी परिस्थिति में है इसके अलावा दुनिया के अंदर और कुछ बचा ही नहीं है । ऐसा लगने लगता है जैसे हमारे सामने एक मजबूत है दीवार हो और उसके पास कोई दुनिया ही नहीं है । इस वक्त हमारे अंदर प्रकट होती है नाउम्मीदी की परछाईं और हम कभी भी उस दीवार के पार झांकने की कोशिश भी नहीं करते हैं,क्योंकि हमारे अंदर ना ही तो ऐसा करने की चेतना होती है, ना ही ऐसा कुछ करने का ज्ञान हमने कभी सीखा होता है ।

3. कोई भी दुःख अंतहीन नही हैं – 

➥मान लीजिए आप किसी बड़ी सुरंग में फंस जाते हैं और आपको उससे गुफा के बारे में पूरा ज्ञान है कि इसका कौन सा रास्ता है जो मुझे बाहर निकाल सकता है तो आप बिल्कुल भी घबराते नहीं है बल्कि आगे बढ़ते हुए जाते हैं और आप बाहर निकल जाते हैं । वहीं अगर आपके अंदर यह विचार बैठ जाता है कि इस गुफा का कोई अंत नहीं है और मैं इसी में फंस कर मर जाऊंगा तो आप उस गुफा से कैसे भी नहीं निकल सकते ।

➥हमें अपने मन की गहराइयों में यह पता होता है कि जीवन में जो भी कष्ट आ रहा है वह किसी भी प्रकार से स्थाई नहीं है बल्कि एक ना एक दिन खत्म हो जाएगा और जिंदगी का एक नया दौर आएगा । परंतु हम हमारे एक्टिव जीवन में‌ अपने दिमाग के अंदर इतना सारा कचरा भर लेते हैं कि हमें उन चीजों का एहसास ही नहीं हो पाता है और हम नकारात्मक विचारों के जाल में फंस जाते हैं।

4. आत्मविश्वास जरुरी  –

➥जीवन में कुछ परिस्थितियां ऐसी भी होती है जिनका कोई हल नहीं होता है तो इंसान उनके साथ भी जी सकता है बल्कि उन चीजों के साथ में वह खुश भी रह सकता है । हमारे अंदर जीवन को जीने की जो लालसा होती है वही इन चीजों का निर्णय करती है कि हम विपरीत परिस्थितियों में किस तरह जिएं । आपने अपने जीवन में बहुत सारे लोगों की कहानियां सुनी होंगी जो बचपन से ही विभिन्न प्रकार की कमजोरियों से ग्रस्त थे अथवा उनके शरीर के किसी हिस्से में कोई विकृति थी , परंतु उन लोगों ने ऐसी स्थाई समस्याओं के साथ भी जीवन जीने का तरीका सीखा और अपने आत्मविश्वास के दम पर सफलताएं भी हासिल करी । वहीं आपने अपने आसपास कुछ ऐसे लोगों को देखा होगा जो हिम्मत हार कर बैठ गए और उन्होंने अपना जीवन नर्क बना लिया ।

➥इन दोनों ही प्रकार के लोगों में एक अंतर देखने को मिलेगा और वह है जीवन को देखने का नजरिया और आत्मविश्वास ।
जो लोग विभिन्न प्रकार की परिस्थितियां और विकृतियां होते हुए भी जीवन जीने का रास्ता खोज लेते हैं उनका निश्चय दृढ़ होता है और उनके सपने सच्चे और जीवन से जुड़े हुए होते हैं ।

5. संघर्षशील लोगों से प्रेरणा लें –

शुरुआत में बताए गए छोटे बच्चे को उम्मीद ना होने की स्थिति में उसके माता-पिता संभाल लेते हैं परंतु आप जीवन के जिस पड़ाव पर हैं उस पड़ाव पर आपको कोई भी संभालने नहीं आएगा बल्कि आप स्वयं ही स्वयं को संभालने वाले होंगे । इस वक्त आपने अपने अंदर किस प्रकार की सोच विकसित की,विपरीत परिस्थितियों को लेकर आपका नजरिया कैसा है, अपने जीवन को जीने का और संकट से लड़ने का कितना ज्ञान अर्जित किया है, यह सारी चीजें आप को संभालने में मदद करेंगी ‌।
इसलिए जीवन में कभी भी ज्ञान अर्जित करना बंद नहीं करना चाहिए और लोगों के संघर्ष की कहानियां पढ़नी चाहिए जिससे आपके मन में संकट की परिस्थितियों में लड़ने का आत्मविश्वास पैदा हो सके ।

हम चाहे किसी विशेष नौकरी की बात करें या फिर किसी विशेष रिश्ते की बात करें अथवा किसी विशेष विचार की बात करें तो हम एक गलती हमेशा करते हैं कि पूरा जीवन उसी पॉइंट पर समेट लेते हैं, और जैसे ही वह चीज हमें मिल नहीं पाती तो हमारी पूरी उम्मीद भयंकर तरीके से टूट जाती है और जीवन में दुख पनपने लगते हैं । हमें, हमारे जीवन को इन सभी चीजों से परे देखना होगा और अपनी चेतना को विस्तीर्ण करना होगा जिससे ऐसा कुछ भी होने पर हम उसके आगे का रास्ता भी भलीभांति देख पाए और जीवन में आगे बढ़ पाएं ।
बहुत सारे लोगों को लाइलाज बीमारी होती है और ऐसे में वह लोग बुरी तरह उम्मीद खो बैठते हैं। मैं उस इंसान को किसी भी प्रकार से गलत तो नहीं कहूंगा क्योंकि यह एक जायज घटना है , और ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है । ऐसे में लोग सोच लेते हैं कि उनके जीवन का अंत आ गया है और वह बचे हुए क्षण बिल्कुल रो-रोकर काटते हैं । अगर कोई इंसान उनको उम्मीद देना भी चाहे तो हो सकता है ,उनको यह एक मजाक लगे और वह सोचे कि मेरे साथ वाकई में एक बुरी घटना हुई है जिसका कोई इलाज नहीं है तो यह केवल और केवल झूठी उम्मीद है । मैं ऐसे बहुत सारे लोगों से मिला हूं जो अपना सब कुछ खो देते हैं परंतु फिर भी वह लोग पूरी दृढ़ता और आत्मविश्वास से जीवन जीते हैं और टूटकर बिखरते नहीं है ।
बहुत सारे ऐसे लोग भी हैं जिनको लाइलाज बीमारियां हुई परंतु जब उनसे बात की जाती है , तो आप पाएंगे कि वह बचे हुए जीवन के प्रत्येक क्षण को आनंद से जीने की चाहत रखते हैं और जीते भी है । तो आप स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि इस दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है,अर्थात मनुष्य किसी भी परिस्थिति में, किसी भी संकट में अपने जीवन को संपूर्ण तरीके से जीने का रास्ता खोज पाने में समर्थ है ।

हमें कभी भी किसी भौतिक वस्तु, किसी एक इंसान, किसी एक विचार को अपना जीवन नहीं बनाना है , बल्कि हमें एक विस्तृत चेतना विकसित करनी चाहिए । आपके लिए हमेशा आपका जीवन ही प्राथमिकता होना चाहिए ना कि कोई भौतिक वस्तु अथवा इंसान । दुनिया की वस्तुएं या फिर लोग आपके लिए अति महत्वपूर्ण हो सकते हैं,परंतु जहां तक प्राथमिकता की बात की जाए वह केवल और केवल स्वयं का जीवन ही होना चाहिए।

धन्यवाद !

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