Hard Work But No Result?

Hard Work But No Result?

0

नमस्कार दोस्तों, आपको कई बार लगता होगा कि आप जीवन की दलदल में फंस गए हैं। अगर आप निकलने का प्रयास करते हैं तो आपके पैर और ज्यादा फंसते जाते हैं। आपका पूरा जीवन थम जाता है और आप आगे बढ़ने में असफल हो जाते हो। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपने जो भी बनने का सोचा वह बन नहीं पाते अथवा कर नहीं पाते हैं। ऐसा नहीं है कि आपने मेहनत करना बंद कर दिया, अब जो भी चाहते हैं उसके लिए मेहनत कर रहे हैं। अब दिन रात पूरी मेहनत और ईमानदारी दिखा रहे हैं पर फिर भी आपको उन लोगों से कम मिल रहा है जो लोग आप से कम मेहनत कर रहे हैं। मेरे दोस्त, मेरे परिवार के अन्य लोग आपसे कम मेहनत करते हैं परंतु फिर भी आगे निकल गए। कोशिश तो उसी स्तर की कर रहे हैं, परंतु आपको हर बार निराशा हाथ लगती है। आपका जीने का मन नहीं करता और आप सोचते रहते हैं कि ईश्वर मेरे साथ यह भेदभाव क्यों कर रहा है। आपको पता होता है कि समय के साथ ही फल मिलता है परंतु फिर भी आप का धैर्य जवाब देने लगा है। आपके मन से शांति गायब हो गई है और हमेशा विचलित रहने लगे हो। आज इस स Blog में हम बात करेंगे कि ऐसी परिस्थिति में अपने मन को शांत कैसे रखा जाए और अपने काम पर वापस से ध्यान केंद्रित कैसे किया जाए? Hard Work But No Result?

Story Of A Bug’s Hard work –

मैंने जितनी भी बातें आपको बताए हैं यह सारी बातें एक बेटी ने अपने पिता से पूछी। उसके पिता बड़े ही समझदार इंसान थे और उनके पास इन सभी चीजों का अनुभव था। उसके पिता उसको एक बगीचे में घुमाने ले कर गए। जब पुत्री और पिता वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा कि रास्ते की बगल में एक कीड़ा उलटा पड़ा हुआ है। उस कीडे के पैर ऊपर की तरफ थे और बड़ी बेचैनी से वह अपने पैरो को हिला रहा था। वह कीड़ा लगातार प्रयास कर रहा था कि कैसे भी सीधा होकर आगे बढ़े परंतु नहीं पढ़ पा रहा था। मित्रों पिता ने अपनी बेटी के सामने उस कीड़े को सीधा किया और वह कीड़ा तुरंत अपनी मंजिल की तरफ चल दिया।

Father’s Learning To His Daughter –

जैसे ही वह कीड़ा वहां से चला गया पिता ने अपनी बेटी की तरफ देखा और कहा किस कीड़े का सब कुछ सलामत था। इस कीड़े के पैर सलामत थे और जिंदा भी था। उसके बावजूद भी कीड़ा फंसा हुआ था और चल नहीं पा रहा था। अगर यह कीड़ा कुछ देर ऐसे ही फंसा रहता है तो शायद कोई बड़ा कीड़ा आकर इसको खा जाता और इसका जीवन समाप्त हो जाता। इसके साथ परेशानी कितनी थी कि यह खुद को सीधा नहीं कर पाया। इसके पास खुद को सीधा करने की जानकारी नहीं थी अर्थात यह चीज को नहीं जानता था, इसलिए यह अटक गया था। इसकी प्रकृति में यह नहीं था कि सीधा कैसे होना है? जिसकी वजह से इसका जीवन समाप्त हो सकता था।
पिता ने बेटी को कहा कि तुम्हारी उम्र के लोगों में और बच्चों में ताकत और क्षमता तो होती है, ऊर्जा भी होती है और मेहनत भी करते हो। इतना सब कुछ होने के बावजूद भी तुम फंस गई हो, क्योंकि तुम्हारा मन उलटा हुआ पड़ा है। तुम्हारी क्षमता, मेहनत और दिमाग में कोई कमी नहीं है बल्कि सिर्फ तुम्हारी सोच में कमी आ गई है इसको तुम सीधा नहीं कर पा रही हो। हमारे शरीर में भी कोई विकार नहीं है, एकदम सही सलामत हो। तुम भाग्यशाली हो, तुम्हारा शरीर स्वस्थ है, क्योंकि इस दुनिया में बहुत सारे इंसान ऐसे होते हैं, जो शारीरिक विकारों के कारण जीवन में आगे नहीं बढ़ पाते।

What we have to consider –

दोस्तों जब भी हम लोग मेहनत करने के बावजूद खुद को निराश पाते हैं तो हमारे नजरिए की वजह से ऐसा होता है। हम इस दुनिया को वैसा नहीं देखते जैसी वाकई में है। हम कर्म करते हैं और तुरंत चाहते हैं कि उसका फल हमें उतना ही मिल जाए जितना हमने सोचा था। आपके जितनी मेहनत करके लोगों को फल मिल जाता है,पर आपको नहीं। हमारा दिमाग सिर्फ मिलने वाली चीज में फंस जाता है। इस दुनिया में प्रत्येक इंसान को कर्म के अनुसार बिल्कुल अलग तरीके से फल मिलता है जिसका हमें ज्ञान नहीं होता है। हम हमारे कर्म को एक बिजनेस के नजरिए से देखते हैं और लाभ की कल्पना करने लगते हैं। जब हम अपना कर्म कर्तव्य समझकर नहीं करते बल्कि सीधा लाभ के अपेक्षा से करते हैं तो निराशा मिलनी जायज है।

My Opinion to Situation –

मेरे विचार में कर्म के बाद फल की अपेक्षा करना बुरा नहीं है, परंतु यह अपेक्षा कभी भी कर्म करने के कर्तव्य से ज्यादा उचित नहीं लगनी चाहिए। आप कर्म करने के बाद फल के बारे में सोचोगे यह इतना बुरा नहीं है, जितना कि आप केवल और केवल फल के बारे में सोचते हो। तुम्हें कर्म करते ही जो कुछ भी तुमने चाहा मिल जाएगा इस नजरिए से कर्म नहीं करना है बल्कि जीवन में कर्म करते हुए आगे बढ़ते रहना तुम्हारी जिम्मेदारी है यह सोचकर कर्म करना है। अगर आज लोगों को देखकर आप निराश होकर बैठ जाते हो तो फिर धीरे-धीरे आपके अंदर की ऊर्जा और क्षमता भी खत्म होने लगेगी। हमारा शरीर का निर्माण ही लगातार कर्म करने के लिए किया गया है। अगर हम सब कुछ छोड़ कर बैठ जाते हैं तो फिर धीरे-धीरे इस शरीर के अंदर बीमारियां उत्पन्न होगी और हमारा जीवन नर्क बन जाएगा। इसलिए कर्म को अपना कर्तव्य समझकर आगे बढ़ते रहिए आपको सही वक्त आने पर जरुर सफलता मिलेगी।

Thank you

Read more interesting articles>> Click Here

Leave A Reply

Your email address will not be published.