Getting Rid From The Fear Of Losing | लोगों को खोने से डर लगता है तो यह पढ़ें |

Getting Rid From The Fear Of Losing

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The Fear Of Losing

नमस्कार दोस्तों, प्रत्येक इंसान की जिंदगी में किसी ना किसी चीज का डर होता है। कुछ इंसान उस डर के ऊपर काबू पा लेते हैं तो कुछ इंसान उसे डर के साथ पूरी जिंदगी बिताने लगते हैं और कभी खुलकर नहीं जी पाते। कुछ लोग भौतिक चीजों को खोने से डरते हैं The Fear Of Losing तो कुछ लोग किसी ऐसे इंसान को खोने से डरते हैं जिसकी उनकी जिंदगी में एक विशेष जगह है। इंसान का डर ना बहुत अच्छी बात है परंतु किसी काल्पनिक डर के साए में जीते रहना सबसे बड़ी मूर्खता भी है। आज की इस ब्लॉग में हम इसी विषय पर चर्चा करने वाले हैं कि किस तरह हम उस डर को कम करके जीवन के सकारात्मक चीजों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

Types Of Fear –

प्रत्येक व्यक्ति की अपनी अलग परिस्थितियां होती हैं और उसके जीवन में घटित होने वाली घटनाओं की अलग संभावनाएं होती है। इस चीज को मध्य नजर रखते हुए हम कह सकते हैं कि उसके जीवन में अलग-अलग प्रकार के डर स्थिति में होते हैं। हमारे जीवन में कुछ वास्तविक डर होते हैं तो कुछ काल्पनिक डर होते हैं। मनुष्य के जीवन में वास्तविक डर उसे मजबूत बनने के लिए प्रेरित करते हैं तो वही काल्पनिक डर का कोई समाधान ना होने पर लोगों का जीवन दुखों से परिपूर्ण भी हो सकता है। अपने डर का समाधान ढूंढने से पहले आपको जानना होगा कि आपके जीवन में जो डर है वह वास्तविक है या फिर काल्पनिक है। डर के सकारात्मक पहलू को देखें तो यह इंसान कुछ जिंदा रखने में और बेहतर बनाते रहने में बेहद मददगार होता है। आइए काल्पनिक और वास्तविक डर को समझने का प्रयास करते हैं।

Actual Fear v/s Imaginary Fear –

☞ मान लीजिए आप अपने घर में बैठे हैं और आप केवल कल्पना करते हुए सोचते हैं कि इस कमरे में शायद कोई भूत हो सकता है और आप डरने लगते हैं। ना ही तो आपके साथ कुछ बुरा घटित हुआ है ना ही आपने कोई ऐसी चीज देखी है जो आपको भूत जैसी लगती हो परंतु फिर भी आपके अंदर डर महसूस हो रहा है तो फिर यह एक काल्पनिक डर है। इस तरह के किसी भी काल्पनिक डर का इस दुनिया में शायद ही कोई समाधान होगा। 

☞ दूसरी तरफ आपके परिवार में या फिर आपकी जिंदगी में एक ऐसा इंसान है जिसके प्रयासों की वजह से पूरे परिवार का पालन पोषण होता है और वह किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जाता है। इस दौरान उसको होने का जो डर आपके अंदर उत्पन्न होगा वह वास्तविक डर है,और इस प्रकार के डर का कहीं ना कहीं समाधान मिल ही जाता है। अगर इसकी गहराई को समझे तो यह है किसी इंसान को खोने का डर नहीं है बल्कि उस बदलाव से डर लगता है जो उसके जाने के बाद होगा। एक और उदाहरण लेते हैं और कल्पना करते हैं कि आपकी नौकरी की वजह से आपके बच्चों की पढ़ाई होती है और पूरे घर का पालन पोषण होता है। ऐसे में अगर आपकी कंपनी या फिर ऑफिस आपको नौकरी से निकालने की बातें करता है तो आपके अंदर जो डर पैदा होता है, उस स्थिति को सोच कर जब आपके पास नौकरी नहीं होगी,तो यह एक वास्तविक डर है।

Understand The Nature Of Fear –

☞ अब हम डर की प्रकृति को समझने का प्रयास करेंगे। किसी इंसान की मृत्यु से आपका बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है और आपके जीवन में एक बड़ा बदलाव आ सकता है। इंसान की प्रकृति ही ऐसी होती है कि वह बदलाव से डरता है। क्योंकि किसी महत्वपूर्ण सदस्य के चले जाने से जो परिस्थितियां उत्पन्न होगी उनके बारे में हमें जरा भी अंदाजा नहीं होता इस वजह से हमारे अंदर एक प्रकार का Fear Of Unknown पैदा हो जाता है। मनुष्य का ज्ञान बहुत सीमित है और इस संसार में ऐसी कोई भी घटना हो सकती है जिसके बारे में आप जानकारी नहीं रखते तो ऐसी परिस्थिति में आपके अंदर डर का पैदा होना लाजमी है। आपने मृत्यु के बाद क्या होता है इसका अनुभव कभी नहीं किया होगा और ना ही इससे संबंधित जानकारी आपके पास है। यही कारण है कि प्रत्येक इंसान मृत्यु से डरता है क्योंकि उसको नहीं पता होता उसके बाद क्या होगा।

☞आपको किसी विशेष भौतिक वस्तु से लगाव हो जाता है और आप एक विशेष परिस्थिति से बंध जाते हैं तो आपको उसे छोड़ने का मन नहीं होता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे साथ जो भी परिस्थिति है या फिर जो भी वस्तु है उसके बारे में हमें संपूर्ण जानकारी होती है। जैसे ही वह वस्तु हमसे छीन ली जाएगी और एक नई चीज हमारी जिंदगी में आएगी तो उसके बारे में हमारे पास जानकारी का अभाव होता है। ना ही हमें यह पता होता है कि वह चीज या परिस्थिति हमारे लिए अच्छी होगी और ना ही हमें यह पता होता है कि वह वर्तमान से भी बेकार परिस्थिति होगी। इसी जानकारी और ज्ञान के अभाव में हमें किसी भी वस्तु या परिस्थिति को छोड़ने से डरते हैं।

Getting Rid From Unknown Fear –

☞अगर आपको अपने अंदर से उस डर को कम करना है जो किसी अनजान घटना के घटित होने से पैदा होता है, तो आपको जीवन में अपनी चेतना और समझ को और अधिक विकसित करना होगा। आपको अपनी बुद्धि को यह बात समझा नहीं होगी कि इस दुनिया के अंदर कोई भी चीज स्थिर नहीं है अर्थात बदलाव का नियम ही सत्य है। अगर हम इस बदलाव के नियम को स्वीकार कर लेते हैं तो हमारे डर की तीव्रता बड़े स्तर तक कम हो जाती है और हम वर्तमान परिस्थिति को पूरी खुशी के साथ जीने लगते हैं। आपको यह भी समझने की आवश्यकता है कि जिन परिस्थितियों को हो आप किसी भी प्रकार का प्रयास करके बदल नहीं सकते तो आपको उन्हें कुछ वक्त के लिए स्वीकार करना होगा। खुद को यह समझाने का प्रयास बेहद जरूरी है कि काल्पनिक डरो का कोई समाधान इस दुनिया में अस्तित्व नहीं रखता है।

☞आपका डर काल्पनिक है या फिर वास्तविक है, आप की परिस्थितियां बदलने लायक है या फिर आप कुछ नहीं कर सकते, आपको किस वक्त अपने आप पर भरोसा करने की आवश्यकता है, ये सारी चीजें आपको अनुभव से ही समझ आती है। जब आप अपनी जिंदगी को बारीकी से देखते और समझते हैं तब आप परिस्थितियों में अंतर करना सीख जाते हैं। कई बार हमें विचार आता है कि अगर यह वस्तु या व्यक्ति अगर मेरी जिंदगी से चला गया तो मेरे जीने का मतलब ही खत्म हो जाएगा। मेरा जीवन ही पर समाप्त हो जाएगा परंतु ऐसा वास्तविक जीवन में नहीं होता है। हमारे जीवन में अच्छी और बुरी घटनाएं घटित होती हैं और जीवन लगातार आगे बढ़ता रहता है।लाखों-करोड़ों लोग रोज किसी ना किसी अभिन्न वस्तु को या व्यक्ति को खो देते हैं, परंतु आप आएंगे कि कुछ समय बाद वह लोग वापस से एक अच्छी जिंदगी जी रहे होते हैं।

Attitude Of Learning From The Fear Of Changing –

जीवन की वह परिस्थिति जब आप किसी विशेष व्यक्ति या वस्तु को खो देते हैं तो उस परिस्थिति के प्रति आपका दृष्टिकोण कैसा है यह आपके आगे के जीवन का निर्धारण करता है। हमेशा की तरह मैं कहूंगा कि अगर आपने किसी एक व्यक्ति या वस्तु को अपने जीवन का केंद्रीय बिंदु बना लिया तो आप जीवन में कभी भी आगे नहीं बढ़ सकते हैं। आपने जिस भी परिस्थिति में जो भी खोया है उससे आपको सीखना होगा और नए बदलाव को स्वीकार करना होगा। जिस तरह आप आने वाली प्रस्तुति के अंदर नकारात्मक चीजें देखते हैं जिनका वास्तव में आपको पता ही नहीं होता तो आपको आगे से उन्हीं परिस्थितियों में सकारात्मक चीजों को देखना होगा। जब हमें किसी नई परिस्थिति के बारे में कोई जानकारी है ही नहीं तो उसके बारे में नकारात्मक ही क्यों सोचा जाए। हम आने वाली प्रस्तुति के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण भी तो बना सकते हैं। आपको यह अच्छे से मालूम है कि जिंदगी हर पल बदलती रहती है। अगर आप इस से बदलती हुई जिंदगी के साथ अपना दृष्टिकोण और अपनी समझ भी बदल लेते हैं तो आपके अंदर से बदलाव के प्रति जो डर है वह खत्म हो जाएगा।

मुझे उम्मीद है इस ब्लॉग से आपको काफी कुछ सीखने को मिला होगा। एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य निभाते हुए आप इस ब्लॉक को शेयर करके लोगों की मदद कर सकते हैं।

धन्यवाद!

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