Getting Rid From Confused Life | जीवन की उलझनों से कैसे छुटकारा पायें ?

Getting Rid From Confused Life

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नमस्कार दोस्तों,आप सभी के साथ ऐसी परिस्थितियां बनी होंगी या फिर बन सकती हैं कि अक्सर हम Confused Life में फंस जाते हैं या उलझ जाते हैं और सही फैसले नहीं ले पाते। इसके अलावा कई बार ऐसा होता है कि हमारे सामने चीजों को Choose करने के बहुत सारे Options आ जाते हैं जहां पर हम तय ही नहीं कर पाते कि हमें किस रास्ते पर जाना है। यह परिस्थिति अक्सर या तो अधिक ज्ञान होने की अवस्था में होती है या फिर जब हमें चीजों के बारे में बिल्कुल ज्ञान नहीं होता तब हम उलझ जाते हैं। आज के इस ब्लॉग में हम इसी मुद्दे पर बात करने वाले हैं। मुझे पूरी उम्मीद है आप लोगों को पसंद आएगा।

The Confusion You are Facing –

दोस्तों कई बार हम गलती से एक ऐसा रास्ता चुन लेते हैं जो हमारे लिए ठीक नहीं होता और हमें बाद में पछताकर उसी रास्ते पर वापस लौटना होता है, जिस रास्ते को हमारे लिए बनाया गया है। यह वह परिस्थितियां होती है जब हम अपने आपको जीवन में खोया हुआ महसूस करते हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि हम परिस्थितियों को ही नहीं समझ पाते और हमें सब कुछ धुंधला धुंधला दिखाई देने लगता है। नहीं हमें यह समझ आता है कि हमें जिंदगी में चाहिए क्या और ना ही हमें यह समझ आता है कि हमें करना क्या है। हम बस एक मानसिक भ्रम शिकार हो जाते हैं और सब कुछ लुटा लुटा सा महसूस होता है। हमारा किसी भी एक चीज में मन नहीं लगता और अक्सर गुस्सा आता रहता है। नहीं अब यह समझ पाते हैं कि हमारे लिए अच्छा क्या है और ना ही हमें यह समझ आता है कि हमारे लिए बुरा क्या है। यहां तक कि हम इस परिस्थिति में हमारा अच्छा चाहने वालों और बुरा चाहने वालों में फर्क नहीं कर पाते।

Reason Behind Confusion ?

पहले हम इसके होने का कारण जान लेते हैं कि अक्सर ऐसी चीजें और ऐसी परिस्थितियां क्यों घटित होती हैं? हम इस भ्रम का शिकार कैसे होते हैं? हम जीवन में एक लक्ष्य चुनते हैं और उसकी राह पर चलते हुए अक्सर हम कई बार भटक जाते हैं। ऐसी परिस्थिति में हमें समझ नहीं आता कि क्या फैसला लेना मेरे लिए सही होगा। जैसे किसी व्यक्ति को एक अध्यापक बनना है और वह किसी कारणवश जीवन में उस मंजिल को प्राप्त नहीं कर पाता है तो अचानक से उसके सामने एक भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसे उसको समझ ही नहीं आता कि जो मेरे जीवन का उद्देश्य था वह तो मैं प्राप्त नहीं कर पाया अब मुझे क्या करना चाहिए ?‌ और यह चीज अक्सर तब होती है जब कोई इंसान एक काम को या फिर किसी एक चीज को अपने जीवन से भी ज्यादा महत्वपूर्ण समझने लगता है। किसी चीज पर इस तरह निर्भर होना ही हमारी सबसे बड़ी मूर्खता होती है।

Understand The Problem with Example –

एक उदाहरण का प्रयोग कर समझने की कोशिश करते हैं – यह सुनने में अच्छा नहीं लगेगा पर समझने के लिए मान लेते हैं कि आपका जीवन साथी जिस पर आप पूरी तरह निर्भर थे आपको छोड़ कर के चला जाता है। ऐसे में आपको बड़े संकट का सामना करना पड़ता है और आप सोचते हैं कि आप मेरा जीवन कैसे चलेगा। आपकी दिनचर्या एक विशेष तरीके से निर्मित होती है और आप उसी में उलझ जाते हो। आप चाहते तो हो कि मुझे इस दिनचर्या से निकल कर के कुछ रोमांचक करना है परंतु आप चाहकर भी ऐसा नहीं कर पाते। आप अपने आप में यकीन दिलाने लगते हो कि अब मेरी जिंदगी ऐसे ही गुजरेगी और मैं ऐसी ही परिस्थितियों में मर जाऊंगा। जिंदगी में एक नया फैसला और एक नई मंजिल चुनने का जो साहस होता है वह पूरी तरह आप खत्म कर लेते हो और आपका जीवन एक भ्रम का शिकार हो जाता है अर्थात उलझनों की एक लंबी कतार में आप खड़े हो जाते हैं। आपके अंदर विचार आने लगता है कि जो लम्हा मैंने खो दिया वह मेरे जीवन का एक अहम हिस्सा था,और उसे मैं कभी वापस प्राप्त नहीं कर पाऊंगा और मेरे जीवन में अब केवल दुख और दुख बचे हुए हैं। आपके दिमाग में एक से बढ़कर एक नकारात्मक और घटिया चीजें घर बनाने लगती हैं।

Getting Rid From Confused Life-

दोस्तों इस उलझन से बाहर निकलने के लिए आपको एक फैसला करना होगा। आपको यह निर्णय लेना होगा कि आपको अपनी अंतिम सांसों तक किस तरह का जीवन जीना है। आपको यह तय नहीं करना है कि किस रास्ते का उपयोग कर जीना है बल्कि आपको यह तय करना है की आपको कैसा जीवन जीना है। दोस्त यह निर्णय लेने से आपके अंदर कर्म की स्वतंत्रता पैदा होगी। ऐसा करने से आप खुशी के प्रति तो बाध्य होंगे परंतु आपको किस तरह का कर्म करना है इसके लिए बाध्य नहीं होंगे। आपको एक कहानी की कल्पना करनी है,जिसमें आपको ही तय करना है कि आप उस कहानी में कैसा किरदार निभाएंगे और किस मंजिल तक किन रास्तों से जाएंगे। आप अपने पसंद की मंजिल तो तय कर सकते हैं परंतु आप उसका रास्ता चलने से पहले निर्धारित नहीं कर सकते।

Never Leave Life on the Way –

जीवन के रास्ते में अलग-अलग प्रकार की समस्याएं आएंगी और ऐसे में आपको रास्ते बदलने भी पड़ सकते हैं। आपके जीवन की कल्पना में आपकी खुशी भौतिक चीजों की गुलाम नहीं होनी चाहिए। अगर रास्ते में चलते हुए कैसे कारणवश आपकी कार खराब हो जाती है तो आप उस कार को वहीं छोड़कर चले नहीं जाते बल्कि आप किसी मैकेनिक की तलाश करते हैं या फिर आप कार को मैकेनिक के पास खींच कर ले जाते हैं। इसी प्रकार हमारे जीवन में भी समस्याएं आती हैं और जीवन उलझ जाता है। इसी तरह हम जीवन को, हार मान कर पीछे नहीं छोड़ सकते बल्कि अपने बुद्धि और विवेक रुपी मैकेनिक की सहायता से परिस्थितियों को सुधारने का प्रयास करेंगे और जीवन में आगे बढ़ने के लिए एक बार फिर से तैयार हो जाएंगे। आप जीवन के किस दौर में हैं या फिर आपकी क्या उम्र है, इससे फर्क नहीं पड़ता आप जहां भी हैं आपको अपनी समस्याओं को सुलझा कर जीवन में और आगे बढ़ना होगा।

Conclusion Of The Matter –

  • आपके द्वारा गढ़ी गई कहानी के किरदार की खुशी भौतिक चीजों पर निर्भर होने की बजाए वास्तविक चीजों पर निर्भर होनी चाहिए। आपकी खुशी का कारण आप खुद निर्धारित करें ना कि लोग किन चीजों से खुश होते हैं उन चीजों को देखकर । यह आपका जीवन है, आप की परिस्थितियां है और आपकी ही मंजिल है जिस पर आपको जाना है तो ऐसे में आपको है तमाम चीजों को निर्धारित करना होगा इसके लिए किसी से Inspire होने की आवश्यकता नहीं है।
  • दोस्तों जीवन के अलग-अलग Phase होते हैं -जैसे बाल अवस्था, जवानी और बुढ़ापा। यह भी सत्य है कि सभी लोगों को इन Phases से गुजरना पड़ता है। प्रत्येक Phases अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसे में हमें कभी भी डरना नहीं चाहिए बल्कि इस चीज को स्वीकार कर लेना चाहिए कि सब लोगों की तरह हमें भी जीवन के अलग-अलग Phases से गुजरना पड़ेगा। बदलाव ही जीवन का नियम है और इस बदलाव को स्वीकार करना ही हमें प्रत्येक Phase में प्रसन्न रखने का तरीका है। हो सकता है आपकी परिस्थितियां आपको स्वीकार करने लायक ना लगे,परंतु प्रकृति के नजरिए से यह सारी चीजें जायज और किसी न किसी कारणवश होती हैं। इसलिए हमेशा परिस्थितियों का सम्मान करें और जीवन को अच्छे तरीके से जीने की संभावनाओं को खोजते रहे।

Thanks

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