Aamer Samanya Gyan Hindi PDF

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Aamer Samanya Gyan:- Byjus Notes पर आपका स्वागत है, आज आपको Aamer महल, Aamer के किले के बारे में बताया जायेगा, इस किले से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी दी जाएगी, जैसे आमेर का इतिहास, Aamer का सामान्य ज्ञान और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी दी जाएगी। यह लेख आपकी सभी सरकारी एग्जाम को ध्यान में रखते हुए लिखा जा रहा है, अगर आप किसी सरकारी एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको इस लेख को ध्यान से पढना चाहिए। और इसके महत्वपूर्ण बिन्दुओं को याद करना चाहिए। आईये जानते हैं आमेर के बारे में, हम आशा करते हैं की यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी। साथ ही आप इस जानकारी की पीडीऍफ़ भी यहाँ से प्राप्त कर पाएंगे, पीडीऍफ़ इस लेख के अंत से प्राप्त कर सकते हैं, आगे दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ें।

Aamer राजस्थान की राजधानी जयपुर की सीमा में स्थित एक उपनगर है। इस नगर को मीणा राजा आलम सिंह द्वारा बसाया गया था, लगभग 967 ईस्वी से यह उपनगर स्थित है। उसके बाद राजपूतों के कछवाहा वंश ने इस नगर को जीत लिया था। आमेर नगर और यहाँ के किले तथा मंदिर राजपूती कला का एक अद्भुत उदाहरण है। आमेर के प्रसिद्द दुर्ग इतने सुन्दर और ऐतिहासिक हैं, की ऐतिहासिक फिल्मो के निर्माताओं को अपनी और आकर्षित करते हैं। इस किले का मुख्य द्वार गणेश पोल के नाम से जाना जाता है, इस द्वार की नक्काशी बहुत आकर्षक है। आमेर किले की दीवारों पर बहुत शानदार कला का प्रदर्शन करते हुए महान कारीगरों ने बहुत ही शानदार चित्र बनाये थे, कहा जाता है की मुग़ल बादशाह जहांगीर ने नाराजगी जाहिर करते हुए उन चित्रों पर प्लास्तर करवा दिया था। लेकिन प्लास्तर उखाड़ने बाद धीरे धीरे वे चित्र फिर से दिखने लगे हैं। अगर आपने कभी चालीस खम्बो वाले शीश महल के बारे में सुना है तो वह भी यही है, जिसमे माचिस की एक तिल्ली जलने पर सम्पूर्ण महल में आकर्षित रौशनी हो जाती है। 

Aamer Samanya Gyan

आमेर Aamer:

आमेर के और भी अन्य नाम हैं जो की अमरपुरा, अमरगढ़, और अम्बावती हैं, इस सभी आकर्षित नामों से भी आमेर के जाना जाता है। यहाँ पर रहने वाली जनता का कहना यह भी है की यहाँ के अम्बकेश्वर भगवान शिव के नाम से इस नगर को आमेर नाम से जाना जाता है। लेकिन कुछ लोगो का यह कहना यह भी है की आयोध्या के राजा के बहुत बड़े भक्त अम्बरीश के नाम से इस नगर को आमेर नाम मिला है। और ऐसा कहा जाता है की अम्बरीश ने यहाँ के दुखी और गरीब लोगो के लिए राज्य के गोदाम और कोठार खोल दिए थे, इससे सभी बहुत खुश थे लेकिन धीरे धीरे गोदाम खाली होने लगे, कोठारों को खाली होते देख जब अम्बरीश के पिता ने उनसे पुछा तो अम्बरीश ने उत्तर दिया की ये सभी गोदाम दुखी और गरीब लोगो के लिए है, और इनके लिए हमेशा खुले रहने चाहिए। अम्बरीश पर राज्य के नियम एवं हितों के विरूद्ध कार्य करने का आरोप लगाया गया। उसके बाद जब उन गोदामों आयी माल की कमी का ब्यौरा हुआ तो उन कोठारों को भरा पाया गया, सब उसे देख कर दंग रह गए की जो कोठार कल तक खाली थे वो आज भर कैसे गए, भक्त अम्बरीश ने इसे ईश्वर की कृपा और चमत्कार कहा। राजा ने अम्बरीश से हार मानी। उसी समय से भक्त अम्बरीश अरावली पहाड़ी पर भक्ति करने लगे, भक्त अम्बरीश के नाम से उपरांत में बदलता हुआ अम्बरीश से “आमेर” या “आम्बेर” हो गया।

शीला-माता देवी मंदिर:

आमेर देश भर में देवी के मंदिर के कारण विख्यात है। यह शिला माता का प्रसिद्द मंदिर भक्तो में मनोकामना पूर्ण करने और चमत्कार करने से श्रद्धा का बहुत बड़ा कारण है। इस मंदिर में स्थित शीला माता की बहुत सुन्दर और मनोहारी मूर्ति है। रोज शाम जब यहाँ आरती होती है तब धुपबत्तियों की सुगंध से यहाँ पर आये सभी भक्त प्रशन्न हो जाते हैं, यह नजारा किसी चमत्कार से काम नहीं होता, मन बिलकुल शांत हो जाता है, शरीर एक दम हल्का हो जाता है, मन में सिर्फ माता की आरती गूंजती है और सभी भक्तगण इस आरती का आनंद लेते हैं। इस आरती में उपस्थित होने के लिए अपने आपको भाग्यशाली मानते हैं। इसलिए आमेर का यह मंदिर विख्यात है, अगर आप भी यहाँ जाने की सोच रहे हैं तो आपका फैसला बिलकुल सही है, यहाँ जाकर आपको बहुत प्रशन्नता होगी।

आमेर शीश महल:

आमेर का प्रसिद्धि का एक कारण शीश महल भी है। शीश महल की दीवारों छत और गुम्बदों पर शीशे के टुकड़े इस तरह से जड़े हुए हैं, की कुछ माचिस की तिल्ली जलने से ही शीशे से ऐसे प्रतिबिम्ब बनते है की पूरा शीश महल जगमगा उठता है, वह नजारा बहुत मनमोहक होता है। यह स्थान महाराजा के चाहिते स्थान में से एक है, आपको यह शीश महल अवश्य देखना चाहिए।

ऐसे ही बहुत से और भी रोमांचक स्थान और कहानियां यहाँ मौजूद है, जिनके बारे में आपको यहाँ जाकर जानना चाहिए, यहाँ  पर स्थित सभी स्थान का अपना एक इतिहास है। इन सभी स्थान को देखकर आप बहुत खुश होंगे, और यहाँ पर आके मन को अनोखी तसल्ली और शांति प्रतीति होगी। जयपुर में ऐसे और भी बहुत से स्थान हैं, जिनकी अलग अलग कहानियां हैं, जिनके बारे में भी आपको जरूर पढ़ना चाहिए। 

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इसी के साथ आज के इस लेख को समाप्त करते हुए में आपसे विदा लेता हूँ, यह जानकारी हमने ऑनलाइन स्रोतों से प्राप्त की है, अगर आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी में किसी तरह की कोई कमी नजर आई हो या इस लेख से सम्बंधित किसी तरह की कोई सिकायत हो तो आप हमें कमेंट करके बता सकते हैं, और हमें मेल कर सकते है, हमारा ऑफिसियल मेल “byjusnotes.com@gmail.com” है, धन्यवाद।

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